बी.सी. में घृणा के लिए कोई स्थान नहीं

ब्रिटिश कोलंबिया में हर व्यक्ति को सुरक्षित महसूस करने तथा अपने समुदाय की गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार है।
नस्लवाद तथा नफ़रत, डर तथा बहिष्कार पैदा करके, इसे असंभव बना देते हैं।
अपने समुदायों में जातिवाद तथा नफ़रत को समाप्त करने के लिए हमें इकठ्ठे मिलकर काम करना होगा जिसके लिए यह समझना आवश्यक है कि यह घृणा क्या है, इसकी सूचना कैसे दी जाए तथा इसे देखने पर हम इसमें दख़लअंदाजी कैसे करें।

अपराध के सभी रूपों में से घृणा आधारित अपराधों की शायद सबसे कम सूचना दी जाती है।  

पहचाने जा सकने वाले समूहों के विरुद्ध यह घृणा असंवेदनशीलता, कट्टरता तथा लक्ष्य-समूह तथा हमारे समाज के मूल्यों दोनों के विनाश पर पनपती है

उच्चतम न्यायालय, कैनेडा
R. v. Keegstra

घृणा अपराधों का प्रभाव सभी पर पड़ता है

यह समझना ज़रूरी है कि घृणा अपराध “संदेशवाहक अपराध होते हैं क्योंकि इसे करने वाला किसी समूह विशेष के सदस्यों को यह संदेश दे रहा होता है कि वे घृणा के पात्र हैं, घटिया हैं तथा किसी विशेष बस्ती, समुदाय, स्कूल या कार्यस्थल में उनकी मौजूदगी अवांछनीय है।“ (अमेरिकी मनोवैज्ञानिक संघ 1998)

कैनेडा में घृणा अपराध किसी व्यक्ति, समूह या संपत्ति के विरुद्ध एक कानूनी अपराध है जो नस्ल, राष्ट्रीय अथवा जातीय मूल, भाषा, रंग, धर्म, लिंग, आयु, मानसिक या शारीरिक असमर्थता, लैंगिक रुचि, लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति या ऐसे किसी अन्य कारक द्वारा पहचाने जा सकने वाले किसी समूह के प्रति अपराधी की पूर्वधारणा, पक्षपात अथवा नफ़रत से प्रेरित होती है।

2018 में कैनेडा में सूचित कुल घृणा आधारित अपराधों में से लगभग 44 प्रतिशत नस्ल अथवा जातीयता पर आधारित थे।

नस्ल जीव विज्ञान पर आधारित नहीं है; “नस्ल” का उपयोग अक्सर एक सामान्य वंश के लोगों के समूह के लिए किया जाता है, जैसे कि समान चमड़ी का रंग।जातीयता को एक ऐसी अवधारणा के रूप में समझा जाता है जिसे हम अधिग्रहण करते हैं  (जैसे  सांझी संस्कृति, इतिहास, भाषा या राष्ट्रीयता)। और अधिक जानने के लिए हम आपको प्रोत्साहित करते हैं।

धार्मिक समूहों के खिलाफ़ घृणा अपराधों को अक्सर उनके कथित या गलत समझे गए धार्मिक पहरावे या जुड़ाव के आधार पर समुदायों या व्यक्तियों के खिलाफ़ लक्षित किया जाता है।

2018 में कैनेडा में सूचित कुल घृणा आधारित अपराधों में से लगभग 36 प्रतिशत धर्म पर आधारित थे। धार्मिक घृणा अपराधों में से 17 प्रतिशत तोड़-फोड़, दीवारों आदि पर अपशब्द या चित्र बनाने या संपत्ति नष्ट करने की अन्य शरारत की घटनाएं थीं।

2018 में कैनेडा में सूचित कुल घृणा आधारित अपराधों में से लगभग 1 प्रतिशत आयु, मानसिक तथा शारीरिक असमर्थता से जुड़े थे।

में कैनेडा में सूचित कुल घृणा अपराधों में से लगभग 12 प्रतिशत कथित लैंगिक रुचि पर आधारित थे।

जैसे जैसे कैनेडा का समाज विकसित होगा, अन्य पहचान योग्य समूह कानून में परिभाषित हो सकते हैं। आपराधिक कोड में किसी “अन्य मिलते-जुलते कारक” को जोड़ने का उद्देश्य जनता के उन वर्गों की रक्षा करना है जो अभी तक पहचाने जाने योग्य समूहों के रूप में परिभाषित नहीं हैं।

घृणा अपराध क्या है

किसी व्यक्ति या संपत्ति के विरुद्ध किया गया लगभग किसी भी प्रकार का अपराध घृणा से प्रेरित हो सकता है। इनमें ऐसे अपराध शामिल हो सकते हैं जैसे हमला, धमकियां, आपराधिक उत्पीड़न तथा शरारत जिसमें दीवारों आदि पर लिखना भी शामिल है।

आपराधिक कोड की धारा  718.2 में घृणा अपराधों के लिए विशिष्ट सज़ा का प्राविधान है। कानून के अनुसार यदि अपराध किसी पहचान किये जा सकने वाले विशिष्ट समूह के विरुद्ध किया गया हो ,तो न्यायालय दंड निर्धारण के समय यह मान सकता है कि उक्त तथ्य एक गंभीर कारक है।

आपराधिक कोड की धाराएं 318 तथा 319  घृणा प्रचार से संबंधित हैं।

धारा 318 के अंतर्गत नरसंहार की वकालत करना या उसको बढ़ावा देना एक कानूनी अपराध है।

धारा 319(1) के अंतर्गत किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसा बयान देना कानूनी अपराध है जो  किसी पहचाने जा सकने वाले समूह के विरुद्ध नफ़रत भड़काता हो और जहां इसके कारण शांति भंग होने की संभावना हो। जैसे, यह अपराध किसी प्रदर्शन या विरोध के संदर्भ में हो सकता है।

धारा 319(2) के अंतर्गत किसी पहचाने जा सकने वाले समूह के विरुद्ध जानबूझ कर नफ़रत फैलाने वाले बयानों को,  निजी बातचीत के अतिरिक्त, संचारित करना एक कानूनी अपराध है। इसमें छापे गए तथा इंटरनेट पर दिए गए, ऑडियो तथा वीडियो सहित, बयान शामिल हैं। यह धारा उन बयानों पर भी लागू हो सकती है जो किसी सार्वजनिक स्थान पर लिखे या बोले गए हों या आम जनता को उपलब्ध स्थानों पर बांटे गए हों।

यह नोट करना महत्त्वपूर्ण है कि घृणा प्रचार संबंधी कानून इस बात का सबूत नहीं मांगते कि उक्त बयान के कारण वास्तव में घृणा का प्रसार हुआ।

आपराधिक कोड की धारा 430 (4.1)  घृणा आधारित शरारत से संबंधित है। यदि पूर्वधारणा, पक्षपात अथवा नफ़रत के कारण किसी पूजा स्थल, स्कूल, वरिष्ठ निवास स्थान या सामाजिक, सांस्कृतिक या खेल संबंधी गतिविधियों या कार्यक्रमों के लिए मुख्य तौर पर किसी पहचान किए जा सकने वाले समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्थान को कोई नुकसान पहुंचाया जाता है या गंदा किया जाता है तो वह एक कानूनी अपराध है।

कानून अक्सर प्रतिस्पर्धात्मक हितों तथा अधिकारों में संतुलन बना कर रखते हैं। कैनेडा में अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं का कैनेडियन चार्टर  का भाग 2 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकारों की सुरक्षा करता है, जबकि कैनेडा का कानून अभिव्यक्ति के ऐसे रूपों के लिए एक उचित सीमा निर्धारित करता है जो जानबूझ कर नफ़रत फैलाते हों।

इन अपराधों के संबंध में जटिल सोच-विचार का अर्थ यह है कि पुलिस तथा सरकारी वकीलों द्वारा उनका ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाता है। नफ़रत द्वारा प्रेरित सभी घटनाएं घृणा अपराध नहीं होती हैं और न ही सभी में कानूनी कारवाई की जाती है। यदि मामले में संभावी कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस द्वारा रेफ़रल की ज़रूरत होती है तो सरकारी वकील स्वतंत्र रूप से इस विशेष विषय पर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नीति का प्रयोग करते हैं।

नफ़रत की घटना व्यवहार की एक अधिक विस्तृत श्रृंखला को परिभाषित करने का एक व्यावहारिक तरीका है जो “घृणा अपराध” की परिभाषा में सही बैठ भी सकता है और नहीं भी बैठ सकता। कई कारकों के ऊपर विचार किया जाता है जिनमें व्यवहार की गंभीरता, उपलब्ध सबूत की किस्म तथा सार्वजनिक हित शामिल हैं तथा अधिकारी यह फैसला कर सकते हैं कि कुछ घृणा, पक्षपात या पूर्वधारणा वाले व्यवहारों में आरोप नहीं लगाया जाएगा तथा मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

नफ़रत वाली सभी घटनाओं में, चाहे अंत में उन्हें आपराधिक माना जाए या नहीं, पीड़ितों तथा समुदायिक समूहों की एक भूमिका होती है – देखें: “सूचना दें” तथा “कार्यवाही करें”

[घृणा]

यह एक तीव्र तथा चरम किस्म की भावना है जो स्पष्ट तौर पर तिरस्कार तथा नफ़रत से जुड़ी है। पहचाने जा सकने वाले समूहों के विरुद्ध यह घृणा असंवेदनशीलता, कट्टरता तथा लक्ष्य-समूह तथा हमारे समाज के मूल्यों दोनों के विनाश पर पनपती है। घृणा एक ऐसी भावना है जिसका उपयोग यदि किसी पहचाने जा सकने वाले समूह के विरुद्ध किया जाए तो इसका अर्थ इस समूह से जुड़े होने के आधार पर व्यक्तियों से नफ़रत करना, उनका तिरस्कार करना, सम्मान न करना तथा उनके साथ दुर्व्यवहार करना होता है।

उच्चतम न्यायालय, कैनेडा - R. v. Keegstra